लाहुल-स्पीति की बेटी देचेन डोलमा का एंकरिंग में जलवा: नेपाल से लेकर शिमला समर फेस्टिवल तक बुलंद की अपनी आवाज

Dechen Dolma

रमेश कंवर: शिमला 

जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति के मुख्यालय केलांग की बेटी देचेन डोलमा (Dechen Dolma) ने अपनी मेहनत और असाधारण प्रतिभा के दम पर एंकरिंग (मंच संचालन) के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। छोटी सी उम्र में अपनी बुलंद आवाज और बेहतरीन मंच संचालन कला के कारण वे इन दिनों प्रदेश भर में सुर्खियों में बनी हुई हैं। वर्तमान में कुल्लू के एक निजी स्कूल में बतौर शिक्षिका कार्यरत देचेन न केवल हिमाचल के विभिन्न राज्यों व सांस्कृतिक मेलों में, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल तक में अपनी आवाज का जादू बिखेर चुकी हैं।

माता सोनम छोमो और स्वर्गीय तारा चंद की पुत्री देचेन डोलमा ने अपने संघर्ष और एंकरिंग करियर के सफर के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि अपने पिता के असामयिक निधन के बाद उनके नाना ने उनका संबल बनकर परवरिश की और बचपन से लेकर स्कूली शिक्षा व कॉलेज की पूरी फीस का खर्च उठाया। इसके साथ ही उनकी मौसी ने भी उन्हें स्वावलंबी और सक्षम बनाने में बेहद अहम भूमिका निभाई है।

देचेन डोलमा ने बताया कि उन्होंने अगस्त 2025 में पेशेवर रूप से अपने एंकरिंग करियर की शुरुआत की थी। मात्र एक वर्ष के संक्षिप्त अंतराल के भीतर ही उन्हें शिमला समर फेस्टिवल, कांगड़ा कार्निवाल, मां शूलिनी मेला (सोलन), सुंदरनगर नलवाड़ मेला, जनजातीय उत्सव, ला-दरचा मेला काजा और रिवालसर छेशु जैसे राज्य के बड़े सांस्कृतिक मंचों पर एंकरिंग करने का गौरव प्राप्त हुआ।

इसके अलावा, उनकी इस कलात्मक प्रतिभा के चलते उन्हें पड़ोसी देश नेपाल में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भी मंच संचालन करने का अंतरराष्ट्रीय अवसर मिला।

Dechen Dolma

मेधावी छात्रा रहीं देचेन

एंकरिंग के साथ-साथ देचेन डोलमा पढ़ाई-लिखाई और शिक्षा के क्षेत्र में भी अत्यंत मेधावी रही हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल मोहल से प्राप्त की, जिसके बाद नॉन-मेडिकल स्ट्रीम में बी.एससी. की डिग्री हासिल की। तत्पश्चात धर्मशाला (कांगड़ा) से बी.एड. करने के साथ-साथ अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. की डिग्री पूरी की। प्रतियोगिता परीक्षाओं में अपनी योग्यता साबित करते हुए उन्होंने पहले ही प्रयास में HPTET और CTET की कठिन परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं।

शिक्षिका के रूप में दे रही हैं सेवाएं, एंकरिंग के जरिए परिवार की आर्थिकी को दे रही मजबूती

शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत देचेन डोलमा ने कुछ समय तक जिला कांगड़ा में बतौर शिक्षिका अपनी सेवाएं दीं और वर्तमान में वे जिला कुल्लू के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में पढ़ा रही हैं। वर्तमान में वे कुल्लू में अपनी मौसी और नानी के साथ रहती हैं, जबकि उनकी माता जी लाहुल में रहती हैं। देचेन ने कहा कि वे भविष्य में भी अपने एंकरिंग करियर को निरंतर जारी रखेंगी ताकि वे स्वयं को और अधिक सक्षम बनाकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान कर सकें।

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