Himachal Weather: 18 सितंबर से कमजोर पड़ेगा मानसून, भू-स्खलन से 59 सडक़ों पर यातायात अभी भी अवरूद्ध

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Himachal Weather: हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून की सक्रियता लगातार बनी हुई है। राजधानी शिमला सहित राज्य के मध्य व निचले पहाड़ी इलाकों में रोजाना हल्की से मध्यम बारिश और गर्जन की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला (IMD) के अनुसार, राज्य में 17 सितंबर तक हल्की से मध्यम वर्षा का क्रम इसी तरह जारी रहने की संभावना जताई गई है।

मंगलवार दोपहर बाद शिमला और आसपास के क्षेत्रों में हुई तेज बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटों में धर्मशाला, सुंदरनगर, कोठी और बिलासपुर के कुछ इलाकों में अच्छी वर्षा दर्ज की गई, जिससे मैदानी व मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में ठंडक बढ़ गई है।

18 सितंबर से मौसम में आएगा सुधार, भारी बारिश का अलर्ट नहीं

मौसम विभाग के अनुसार 18 सितंबर से प्रदेश में मानसूनी बारिश की तीव्रता में कमी देखने को मिलेगी। इस दौरान उच्च पर्वतीय इलाकों और मध्य पहाड़ियों के गिने-चुने स्थानों पर ही हल्की बौछारें पड़ने के आसार हैं, जबकि अधिकांश हिस्सों में मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा।

राहत की बात यह है कि आगामी 21 सितंबर तक प्रदेश के किसी भी जिले के लिए भारी बारिश या ऑरेंज/येलो अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इससे भू-स्खलन प्रभावित क्षेत्रों और बंद सड़कों को बहाल करने के कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

59 सड़कों पर यातायात ठप, मंडी और कुल्लू जिले सबसे ज्यादा प्रभावित

लगातार हो रही मानसूनी बारिश और जगह-जगह हुए भू-स्खलन के कारण वर्तमान में राज्य भर में 59 सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद पड़ी हुई हैं। सबसे ज्यादा असर मंडी जिले में देखने को मिला है जहां 26 सड़कें अवरुद्ध हैं, जबकि कुल्लू में 12 और कांगड़ा जिले में 10 मुख्य व संपर्क मार्गों पर वाहनों की आवाजाही ठप है।

लोक निर्माण विभाग की टीमें जेसीबी मशीनों के साथ मलबे को हटाकर मार्गों को सुचारू बनाने के कार्य में जुटी हुई हैं। प्रशासन ने वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को संवेदनशील व ढलान वाले क्षेत्रों में यात्रा करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है।

मानसून सीजन में अब तक 3,211 करोड़ से अधिक की चपत

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून से शुरू हुए इस मानसून सीजन में बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड के कारण प्रदेश को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। अब तक सरकारी व निजी परिसंपत्तियों, सड़कों, पेयजल योजनाओं और बिजली ट्रांसफार्मरों को मिलाकर करीब 3,211 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान आंका जा चुका है।

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