Himachal News: हिमाचल प्रदेश में उच्चतर शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक, समावेशी, कौशलयुक्त और रोजगारपरक बनाने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित रखने के बजाय इसे ज्ञान, कौशल, अनुसंधान, नवाचार, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। यह बात प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शनिवार को कुल्लू के देव लोक रिसोर्ट बड़ाग्रां में आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय प्राचार्य सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर कही।
‘उच्चतर शिक्षा में सुधार’ विषय पर आधारित इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन हिमाचल प्रदेश उच्चतर शिक्षा विभाग एवं राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश के सर्वाधिक साक्षर राज्यों में शामिल है और राज्य सरकार अपने कुल वार्षिक बजट का 18 प्रतिशत हिस्सा अकेले शिक्षा क्षेत्र पर खर्च कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राचार्य महाविद्यालयों में केवल प्रशासनिक प्रमुख ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक नेतृत्व की मुख्य धुरी हैं।
26 कॉलेजों में चार वर्षीय स्नातक कोर्स शुरू
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को उच्चतर शिक्षा में बदलाव की आधारशिला बताते हुए कहा कि प्रदेश के 26 राजकीय महाविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक डिग्री कार्यक्रम सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है। वर्तमान में प्रदेश के 142 राजकीय महाविद्यालय उच्चतर शिक्षा के विस्तार को दर्शाते हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग में विभिन्न श्रेणियों में 5,071 नियुक्तियां, पदोन्नतियां और नियमितीकरण किए गए हैं, जिनमें 144 प्राचार्य तथा 534 एसोसिएट व सहायक प्रोफेसर के पद शामिल हैं। इसके अलावा लोक सेवा आयोग के माध्यम से सहायक आचार्य के 373 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है।
50 कॉलेज होंगे डिजिटल, एआई और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों से जुड़ेंगे विद्यार्थी
वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश के 50 राजकीय महाविद्यालयों का डिजिटल रूपांतरण किया जा रहा है, जहां डिजिटल लाइब्रेरी, वर्चुअल व लाइव क्लासरूम, आईसीटी लैब और सीसीटीवी सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 20 राजकीय महाविद्यालयों में चल रहे बी-वॉक पाठ्यक्रमों से पिछले पांच वर्षों में 1,914 विद्यार्थियों को रोजगार मिला है। अब इसका विस्तार 19 अन्य कॉलेजों में किया जा रहा है। आने वाले समय में कॉलेज की लैब के माध्यम से छात्रों को एआई, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डिजिटल ऑटोमेशन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों से जोड़ा जाएगा।
पीएम-उषा के तहत 179.75 करोड़ मंजूर, वाईएस परमार योजना से 147 छात्रों को मिला शिक्षा ऋण
आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण की जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए 179.75 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इससे कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही निर्धन व मेधावी विद्यार्थियों की सहायता के लिए शुरू की गई ‘वाईएस परमार विद्यार्थी ऋण योजना’ के माध्यम से अब तक 147 जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय लाभ प्रदान किया गया है।
अंतर-महाविद्यालय रैंकिंग पुस्तिका का विमोचन
सम्मेलन के दौरान शिक्षा मंत्री ने अंतर-महाविद्यालय रैंकिंग पुस्तिका का विमोचन किया और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कॉलेजों को सम्मानित किया। टीआर-1 श्रेणी में राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर प्रथम, आरकेएमबी शिमला द्वितीय और संजौली तृतीय स्थान पर रहे। टीआर-2 श्रेणी में ठियोग प्रथम, भोरंज द्वितीय तथा सुन्नी तृतीय रहे। वहीं टीआर-3 श्रेणी में दाड़लाघाट पहले, धनेटा दूसरे और संगड़ाह तीसरे स्थान पर रहा। पुस्तकालय रैंकिंग में हमीरपुर, रामपुर, जोगिन्दरनगर और धर्मशाला महाविद्यालय संयुक्त रूप से अव्वल रहे। इस अवसर पर निदेशक उच्चतर शिक्षा डॉ. सुनीता सिंह ने शिक्षा विभाग की उपलब्धियों का ब्योरा रखा।