रमेश कंवर: शिमला
Himachal News: बहुउद्देश्यीय किशाऊ बांध परियोजना के विरोध में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों के प्रभावित ग्रामीणों ने गुरुवार को कुंवानू में उग्र प्रदर्शन किया। किशाऊ बांध संघर्ष समिति के बैनर तले एकजुट हुए ग्रामीणों ने मिनस-देहरादून मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर केंद्र और दोनों राज्य सरकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सुबह करीब दस बजे शुरू हुए इस विरोध-प्रदर्शन के चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कुंवानू बाजार पूरी तरह बंद रहा।
इस जन-प्रदर्शन में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के करीब 40 गांवों से सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भेजकर किशाऊ बांध परियोजना को लेकर अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावितों की राय और सहमति लिए बिना ही भूमि से जुड़े एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम दम तक संघर्ष का ऐलान
किशाऊ बांध संघर्ष समिति के अध्यक्ष सूर्य प्रताप सिंह चौहान ने कहा कि कुंवानू की उपजाऊ जमीन और स्थानीय निवासियों के जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ी जाएगी। महिला मोर्चा की अध्यक्ष अर्चना राणा ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण अपनी पैतृक भूमि को डूबने से बचाने के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे। रुद्र सेना के अध्यक्ष राकेश उत्तराखंडी और संघर्ष समिति के संरक्षक डॉ. जोशी ने चेतावनी दी कि प्रभावितों के हितों की अनदेखी कर बनने वाली इस परियोजना को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बांध का स्थान बदलने और कुंवानू शम्भर नाम रखने की प्रमुख मांग
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र व राज्य सरकार के समक्ष अपनी मुख्य मांगें रखते हुए कहा कि किशाऊ बांध के वर्तमान प्रस्तावित स्थल में बदलाव किया जाए और इसे ‘कुंवानू शम्भर’ नाम दिया जाए। ग्रामीणों ने साफ किया है कि जब तक उनकी जायज मांगों और आपत्तियों का स्थाई समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक यह आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।