रमेश कंवर: केलांग
Himachal News: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहुल-स्पीति में पावन ड्रिलबु री (घंटा गिरी) पर्वत की धार्मिक परिक्रमा के दौरान अचानक बिगड़े मौसम और भीषण बर्फबारी ने भारी तबाही मचाई है। 12 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर कड़ाके की ठंड, ऑक्सीजन की कमी और रास्तों में फिसलन के चलते दो महिला श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, बुजुर्गों और बच्चों सहित कई अन्य श्रद्धालु घायल व गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं। इस धार्मिक यात्रा में करीब 2,500 श्रद्धालु भाग ले रहे थे।
क्षेत्रीय अस्पताल केलांग की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुषमा ने दो महिला श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए रखा गया है, जिसके बाद ही मौत की सटीक वजह स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद घायलों को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया है, जहां हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपोथर्मिया और गिरकर चोटिल हुए लोगों का उपचार जारी है।
पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने लापरवाही पर उठाए सवाल
इस भीषण हादसे पर पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रवि ठाकुर ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। इसके साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन (DDMA) की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने कहा कि 12 हजार फीट की अत्यधिक दुर्गम ऊंचाई पर इतनी बड़ी यात्रा के दौरान सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं का न होना प्रशासनिक नाकामी को दर्शाता है। रवि ठाकुर ने आरोप लगाया कि कड़ाके की ठंड और मौसम में बदलाव की पहले से आशंका होने के बावजूद प्रशासन ने श्रद्धालुओं को समय पर चेतावनी जारी नहीं की, जो कि बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। समय रहते अलर्ट जारी करने और सुरक्षा प्रबंध दुरुस्त करने से दो मासूम जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग
पूर्व विधायक ने कहा कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन और भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह पुलिस बल, रेस्क्यू टीमें और मेडिकल कैंप तैनात किए जाने चाहिए थे। उन्होंने प्रदेश सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि इस घटना की केवल “खराब मौसम” का बहाना बनाकर लीपापोती न की जाए। रवि ठाकुर ने इस पूरे हादसे की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि यह उजागर हो सके कि प्रशासन और पुलिस की तैयारियों में कहां चूक हुई। उन्होंने कहा कि दोषियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे कठिन धार्मिक अभियानों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा से कोई खिलवाड़ न हो।