रमेश कंवर: शिमला
Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में मंडी सदर से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अनिल शर्मा के एक बयान ने सियासी भूचाल ला दिया है। जिले के कोट-तुंगल (कोटली) में आयोजित एक खेलकूद प्रतियोगिता के समापन समारोह के दौरान अपनी ही पार्टी के सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अनिल शर्मा ने सार्वजनिक मंच से कहा कि “यहां के सांसदों के तिलों में तेल नहीं है।” इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कार्यप्रणाली की जमकर सराहना की, जिससे भाजपा के आंतरिक समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अनिल शर्मा ने खुलासा किया कि कोटली में बहुप्रतीक्षित पार्किंग निर्माण के लिए लगभग दो करोड़ रुपये की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने प्रदेश के चारों भाजपा सांसदों से 25-25 लाख रुपये की आर्थिक मदद मांगी थी, लेकिन किसी भी सांसद से कोई सहायता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री सुक्खू के समक्ष यह मामला रखा, जिसके तुरंत बाद राज्य सरकार से धनराशि स्वीकृत हुई और अब पार्किंग का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।

कॉलेज भवन के लिए 80 लाख स्वीकृत, विधायक बोले- विकास कार्यों से डर रहे विरोधी
भाजपा विधायक अनिल शर्मा ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि कोटली में पार्किंग के अलावा कॉलेज भवन के निर्माण के लिए भी प्रदेश सरकार से 80 लाख रुपये की राशि स्वीकृत करवाई गई है। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि यह मंडी सदर के विधायक का ही डर है जिसके कारण क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए लगातार बजट आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन विकास परियोजनाओं की नींव उन्होंने रखी है, उन्हें पूरा करवाने के लिए वे लगातार प्रयास जारी रखेंगे और यदि आवश्यकता पड़ी तो अगले साल भी बजट लाएंगे।
अनिल शर्मा के ब्यान, कहीं बगावती सुर तो नहीं!
उल्लेखनीय है कि अनिल शर्मा पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री स्वर्गीय पंडित सुखराम के सुपुत्र हैं। वे पूर्व में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे और जयराम सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में उनके पुत्र आश्रय शर्मा द्वारा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के कारण उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। प्रदेश की चारों लोकसभा सीटों पर भाजपा के सांसद हैं, जिनमें मंडी से कंगना रनौत, हमीरपुर से अनुराग ठाकुर, कांगड़ा से डॉ. राजीव भारद्वाज और शिमला से सुरेश कश्यप शामिल हैं। इसके बावजूद अनिल शर्मा का खुलकर मुख्यमंत्री सुक्खू की तारीफ करना प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।