Himachal News: ओबीसी सूची में शामिल करने के मामलों पर अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की बैठक, शिमला जिले के समुदायों की समीक्षा

2 घंटे पहले
Himachal News OBC Commission Review Meeting Shimla

Himachal News: हिमाचल प्रदेश अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की शिमला जिले की विभिन्न जातियों और समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष प्रभात चंद ने की। बैठक के दौरान संबंधित समुदायों की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिति का निर्धारित 25 मानकों के आधार पर गहन मूल्यांकन किया गया।

आयोग के अध्यक्ष प्रभात चंद ने बताया कि सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए 25 कड़े मानदंड तय किए गए हैं। जो भी जाति या समुदाय इन सभी मानकों को पूरा करता है, उसे ही ओबीसी का दर्जा दिया जाता है। हालांकि, कई क्षेत्रों से समय पर विस्तृत रिपोर्ट न मिलने के कारण इस पूरी प्रक्रिया में देरी आ रही है।

 

ब्राह्मण भुजुरु, कलाल और भाट समुदायों की रिपोर्ट अभी अधूरी

बैठक में प्रस्तुत की गई जानकारियों के अनुसार ब्राह्मण भुजुरु, ब्राह्मण आचारज, कुलाल/कलाल और भाट/भट्टा समुदायों के संबंध में आयोग द्वारा निर्धारित 25 मापदंडों की पूर्ण जानकारी अभी तक प्राप्त नहीं हो सकी है। यद्यपि इस संदर्भ में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (कानून एवं व्यवस्था) शिमला की ओर से सूचनात्मक पत्र और अनुस्मारक प्राप्त हुए हैं, लेकिन पूर्ण डेटा न मिलने से अंतिम निर्णय लंबित है।

 

डोडरा क्वार समुदाय की समीक्षा और सार्वजनिक सुनवाई का ब्योरा

डोडरा क्वार समुदाय के मामले में आयोग ने 11 और 12 जून 2026 को क्वार व डोडरा क्षेत्र में सार्वजनिक सुनवाई की थी। इसके बाद 25 जून 2026 को एसडीएम डोडरा क्वार की ओर से 25 मापदंडों पर आधारित रिपोर्ट आयोग को सौंपी गई। रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के वैवाहिक संबंधों, भूमि जोत के आकार और आर्थिक स्थिति जैसे कुछ बिंदुओं पर स्थिति और स्पष्ट करने की आवश्यकता बताई गई है।

 

पिछड़ेपन के लाभ और ईडब्ल्यूएस आरक्षण की वर्तमान स्थिति

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार डोडरा क्वार क्षेत्र पहले से ही अनुसूचित पिछड़ा क्षेत्र घोषित है, जिससे स्थानीय लोगों को पिछड़ेपन से जुड़े विभिन्न लाभ मिल रहे हैं। इसके साथ ही क्षेत्र के निवासियों को ईडब्ल्यूएस श्रेणी का लाभ भी प्राप्त हो रहा है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्थानीय परंपराओं के अनुसार क्षेत्र में 21 वर्ष से कम आयु में विवाह नहीं होते और न ही विवाह के दौरान कोई निर्धारित राशि लेने की कुरीति है।

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