Manimahesh Yatra: त्रिलोचन महादेव के वंशज संचुई के चेले 84 मंदिर से डल झील रवाना, आज निभाई जाएगी ‘डल तोड़ने’ की परंपरा

Manimahesh Yatra Sanchui Chele

रमेश कंवर: चंबा

Manimahesh Yatra: भरमौर की सदियों पुरानी धार्मिक आस्था, लोक विश्वास और देव परंपराओं का जीवंत निर्वहन करते हुए त्रिलोचन महादेव के वंशज एवं संचुई गांव के शिव चेले ऐतिहासिक 84 मंदिर प्रांगण से श्री मणिमहेश डल झील के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। 17 सितंबर 2026 को आरंभ हुई यह पावन यात्रा आज यानी 18 सितंबर 2026 को डल झील पहुंचेगी, जहां की प्रसिद्ध एवं अति-महत्वपूर्ण “डल तोड़ने” की पारंपरिक रस्म का निर्वहन किया जाएगा।

ऐतिहासिक 84 मंदिर प्रांगण में 84 महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात संचुई के चेले पारंपरिक हिमाचली वेशभूषा, देवी-देवताओं के पवित्र प्रतीकों और छड़ियों के साथ ढोल-नगाड़ों व वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच विभिन्न पड़ावों को पार करते हुए डल झील की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

Manimahesh Yatra Sanchui Chele
मणिमहेश यात्रा के दौरान 84 मंदिर भरमौर से डल झील की ओर प्रस्थान करते संचुई के शिव चेले

भरमौर की लोक संस्कृति और देव परंपरा की निरंतरता

भरमौर की धार्मिक व लोक परंपरा में त्रिलोचन महादेव का अति-विशिष्ट स्थान माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, उनके वंशजों से जुड़ी यह यात्रा श्री मणिमहेश यात्रा की सबसे प्राचीन एवं अनिवार्य परंपराओं की निरंतरता के रूप में देखी जाती है। पीढ़ियों से चली आ रही इस पवित्र परंपरा में न केवल अगाध धार्मिक आस्था झलकती है, बल्कि भरमौर की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों का अनुपम दृश्य भी देखने को मिलता है। 18 सितंबर को श्री मणिमहेश डल झील में परंपरागत “डल तोड़ने” (पवित्र स्नान की औपचारिक शुरुआत) की रस्म पूर्ण श्रद्धा के साथ निभाई जाएगी।

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