4 अक्तूबर 2026 का पंचांग: जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और आज का विशेष उपाय

8 घंटे पहले
आज का पंचांग

4 October 2026 ka Panchang: वैदिक शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन प्रातःकाल पंचांग पढ़ना शुभ माना जाता है। पंचांग हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अवयवों से बना है- तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। पंचांग एक निश्चित स्थान और समय के लिये सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति को दर्शाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार आज रविवार है। रविवार का दिन प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य देव को समर्पित होता है। आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का आठवां दिन है। आज के दिन अष्टमी तिथि का श्राद्ध, महालक्ष्मी व्रत समापन एवं जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत किया जाएगा। रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देने, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने और पितरों के निमित्त तर्पण व दान करने से आरोग्य, तेज, मान-सम्मान, संतान सुख और पितरों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

ज्योतिषाचार्य मणि पुरोहित (Mani Purohit) द्वारा प्रस्तुत यह पंचांग आपको आज के शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिन्दू मास एवं पक्ष की सम्पूर्ण जानकारी देता है। पंचांग के अनुसार शुभ दिन, शुभ तारीख और शुभ समय पर कार्य आरंभ करने से किसी भी प्रकार के नकारात्मक प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। अगर आप भी आज कोई शुभ काम करने की सोच रहे हैं तो देखिए आज का पंचांग और जानें आज का शुभ और अशुभ मुहूर्त, और जानें कैसी रहेगी आज ग्रहों की चाल।

 

4 October 2026 ka Panchang: ज्योतिषीय गणना, ग्रह और नक्षत्र

शक संवत: 1948 (पराभव संवत्सर)

विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि)

मास: पूर्णिमांत– आश्विन, अमांत– भाद्रपद

पक्ष: कृष्ण

तिथि: अष्टमी (सुबह 06:11 बजे तक), उपरांत नवमी तिथि प्रारंभ (अष्टमी व नवमी तिथि का श्राद्ध संपात)।

दिन: रविवार

नक्षत्र: आर्द्रा

योग: वरीयान् (दोपहर 02:11 बजे तक), उपरांत परिघ योग प्रारंभ।

करण: वणिज (सुबह 06:11 बजे तक), विष्टि/भद्रा (शाम 05:01 बजे तक), उपरांत बव करण प्रारंभ।

प्रविष्टे: 18 आश्विन

ऋतु: वैदिक ऋतु – वर्षा, द्रिक ऋतु – शरद

 

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (शिमला, हिमाचल प्रदेश)

सूर्योदय: प्रातः 06:22 बजे

सूर्यास्त: सायं 05:59 बजे

चन्द्रोदय: रात 11:42 बजे (4 अक्तूबर)

चन्द्रास्त: दोपहर 02:24 बजे (5 अक्तूबर)

चन्द्र राशि: चंद्रमा मिथुन राशि पर गोचर कर रहा है (पूरा दिन-रात)।

सूर्य राशि: सूर्य देव कन्या राशि पर गोचर कर रहे हैं।

 

4 अक्तूबर 2026 के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:47 से 05:34 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 बजे तक।

अमृत काल: शाम 05:48 से रात 07:20 बजे तक।

आनन्दादि योग: पद्म (प्रातः 03:07 बजे तक, 5 अक्तूबर), उपरांत छत्र योग।

 

4 अक्तूबर 2026: राहुकाल और अशुभ समय

राहुकाल: शाम 04:31 से 05:59 बजे तक (इस समय शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं)।

यम गण्ड: दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक।

कुलिक: दोपहर 03:04 से शाम 04:31 बजे तक।

दुर्मुहूर्त: शाम 04:24 से 05:11 बजे तक।

वर्ज्यम्: सुबह 07:12 से 08:44 बजे तक।

भद्रा: सुबह 06:11 से शाम 05:01 बजे तक।

 

4 अक्तूबर 2026 के प्रमुख व्रत और पर्व

अष्टमी तिथि श्राद्ध: आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि का श्राद्ध एवं पितृ तर्पण।

जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत: संतान की दीर्घायु, आरोग्य एवं मंगल कामना हेतु रखा जाने वाला निर्जला व्रत।

अष्टका श्राद्ध एवं कालाष्टमी: पितृ तर्पण तथा भगवान भैरव देव की पूजा-आराधना।

 

4 अक्तूबर 2026 के लिए विशेष उपाय (Special Remedy)

आज रविवार का दिन है और पितृ पक्ष की अष्टमी तिथि का पावन योग है, इसलिए प्रातः स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, रोली, अक्षत, लाल पुष्प और थोड़ा सा गुड़ मिलाकर भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दें। ‘ॐ सूर्याय नमः’ अथवा ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करें। इसके पश्चात दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों के निमित्त जल में काले तिल मिलाकर तर्पण करें तथा किसी निर्धन या ब्राह्मण को गुड़, गेहूं, तांबे के बर्तन या लाल वस्त्र का दान करें। इससे सूर्य देव की कृपा से मान-सम्मान व आरोग्य प्राप्त होगा और पितरों के आशीर्वाद से कुल में समृद्धि बनी रहेगी।

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