Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने बैजनाथ उपमंडल के अंतर्गत मुल्थान तहसील की ग्राम पंचायत पोलिंग के अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में स्थित एक ग्लेशियर झील का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य झील की वर्तमान स्थिति, आसपास के भौगोलिक ढांचे और भविष्य में किसी भी संभावित प्राकृतिक आपदा के जोखिमों का सटीक आकलन करना था।
कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा तथा एसडीएम बैजनाथ संकल्प गौतम ने स्वयं 22 सदस्यीय दल की अगुवाई करते हुए लगभग 14 किलोमीटर लंबे कठिन और जोखिम भरे पहाड़ी ट्रैक को पैदल पूरा किया। टीम ‘डाइनसर’ नामक उच्च पर्वतीय स्थान पर स्थित ग्लेशियर झील तक पहुंची और मौके पर झील के जल स्तर, जल प्रवाह की दिशा और निचले इलाकों पर इसके संभावित प्रभावों का बारीकी से जायजा लिया।
माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट की रेस्क्यू टीम भी रही शामिल
इस साहसिक निरीक्षण अभियान में मुल्थान के तहसीलदार हरीश, डीडीएमए प्रतिनिधि कुलदीप सिंह, जल शक्ति व राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट की सर्च एंड रेस्क्यू टीम के प्रभारी जितेंद्र सहित कुल 22 सदस्य शामिल रहे। टीम ने प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद डाइनसर झील तक पहुंचकर जल निकासी और आसपास की पहाड़ियों का गहन अध्ययन किया। निरीक्षण के बाद उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने राहत भरी जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान में ग्लेशियर झील से किसी भी प्रकार के तात्कालिक खतरे के संकेत नहीं हैं और झील का जल स्तर सामान्य बना हुआ है।
झील से फिलहाल कोई तात्कालिक खतरा नहीं
निरीक्षण के बाद उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने राहत भरी जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान में ग्लेशियर झील से किसी भी प्रकार के तात्कालिक खतरे के संकेत नहीं हैं और झील का जल स्तर सामान्य बना हुआ है। हालांकि, कांगड़ा जिला भूकंपीय और भौगोलिक दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील है, इसलिए भविष्य में किसी बड़े भूकंपीय झटके या प्राकृतिक घटना की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
झील क्षेत्र में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम
डीसी हेमराज बैरवा द्वारा झील क्षेत्र में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस अत्याधुनिक प्रणाली के माध्यम से झील के जलस्तर अथवा अन्य महत्वपूर्ण परिस्थितियों में किसी भी असामान्य परिवर्तन की स्थिति में समय रहते प्रशासन और प्रभावित होने वाले क्षेत्रों को त्वरित चेतावनी देने में मदद मिलेगी।
पोलिंग, चेरना और लोहारडी में होगी मॉक ड्रिल
संभावित आपदा जोखिमों से निपटने के लिए सामुदायिक तैयारी पर भी विशेष बल दिया गया है। झील से प्रभावित हो सकने वाले निचले क्षेत्रों—पोलिंग, चेरना, लोहारडी और लोहारडी स्कूल में समय-समय पर मॉक ड्रिल व इवेक्युएशन अभ्यास आयोजित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने और बचाव टीमों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए जागरूक किया जा सके।