रमेश कंवर: शिमला
Himachal News: शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल अंतर्गत चिड़गांव में सोमवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब जांगलिख पुल के समीप अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। इस भयानक भूस्खलन के कारण सड़क पर भारी मात्रा में मलबा और बड़ी चट्टानें जमा हो गईं, जिससे मार्ग पर वाहनों की आवाजाही दोनों ओर से पूरी तरह ठप हो गई। राहत की बात यह रही कि घटना के वक्त वहां से गुजर रहे कुछ राहगीरों ने तुरंत भागकर अपनी जान बचाई। हालांकि, हादसे के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय निवासियों के अनुसार जांगलिख पुल के आसपास बीते रविवार से ही पहाड़ी से रह-रहकर छोटे-बड़े पत्थर गिर रहे थे, जिससे संभावित खतरे की आशंका पहले से जताई जा रही थी। सोमवार सुबह जब ढलान अचानक धंस गई, तो विशालकाय मलबा मुख्य मार्ग पर आ गिरा। इस लैंडस्लाइड का असर पास बहने वाली सुंदरू खड्ड पर भी पड़ा, जहां मलबा गिरने से पानी का प्राकृतिक बहाव कुछ समय के लिए बाधित हो गया और ग्रामीणों में जलस्तर बढ़ने की दहशत फैल गई।
रोहड़ू-चिड़गांव मार्ग अवरुद्ध
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। सड़क पर अत्यधिक मलबा और भारी चट्टानें होने के कारण मार्ग बहाली का काम शुरू करने से पहले पहाड़ी के खतरे वाले हिस्से को सुरक्षित करना बेहद जरूरी है। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन ढलान से अभी भी रह-रहकर गिर रहे पत्थरों के कारण सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुंदरू खड्ड के जलप्रवाह पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। अधिकारियों ने क्षेत्र के लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और धैर्य बनाए रखने का आग्रह किया है।
पब्बर नदी और जांगलिख क्षेत्र में न जाने की सलाह, अलर्ट पर स्थानीय प्रशासन
मौसम विभाग द्वारा शिमला और आसपास के इलाकों में दर्ज की गई हल्की बारिश के चलते पहाड़ी ढलानें और कमजोर हो गई हैं, जिससे भूस्खलन का जोखिम बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीणों, पर्यटकों और यात्रियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जांगलिख क्षेत्र, पब्बर नदी और आसपास की खड्डों के तटीय इलाकों में जाने से पूरी तरह परहेज करें। बारिश के दौरान नदियों और खड्डों का जलस्तर अचानक बढ़ने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में सभी को सुरक्षित स्थानों पर रहने और प्रभावित क्षेत्र से दूरी बनाए रखने की कड़ी हिदायत दी गई है।