रमेश कंवर: शिमला
Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की विरासत को लेकर घमासान छिड़ गया है। पूर्व सांसद और कांग्रेस वर्किंग कमेटी की वरिष्ठ सदस्य प्रतिभा सिंह ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को एक पत्र भेजकर स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के नाम और साख का इस्तेमाल कर किसी भी नई राजनीतिक पार्टी को पंजीकृत करने पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में चल रही खबरों का हवाला देते हुए उन्होंने साफ किया है कि कुछ लोग जनता को गुमराह करने के लिए उनके परिवार की अनुमति के बिना इस तरह की कोशिशें कर रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।
‘राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस‘ और ‘वीर कांग्रेस‘ जैसे नामों पर जताई कड़ी आपत्ति
प्रतिभा सिंह ने अपने पत्र में मुख्य रूप से ‘राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस’ और ‘वीर कांग्रेस’ जैसे नामों के पंजीकरण पर कड़ी आपत्ति जताई है। केवल वीरभद्र सिंह का नाम ही नहीं, बल्कि उनकी रियासती और राजनीतिक पहचान से जुड़े शब्दों जैसे ‘राजा’, ‘बुशहर’ और ‘राजा बुशहर’ के उपयोग को भी प्रतिबंधित करने की मांग की गई है।
विरासत के दुरुपयोग को रोकने और परिवार का पक्ष सुनने का किया आग्रह
उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि लोकतंत्र में पार्टी बनाने का अधिकार सबको है, लेकिन किसी और की विरासत का गलत इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने आयोग से यह भी अनुरोध किया कि यदि भविष्य में ऐसा कोई भी आवेदन आता है, तो कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले वीरभद्र सिंह के परिवार का पक्ष जरूर सुना जाए।
कांग्रेस के भीतर आंतरिक तनातनी और सरकारी पोस्टरों से तस्वीर गायब होने पर उपजा विवाद
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के भीतर वीरभद्र सिंह की विरासत को लेकर आंतरिक तनातनी पहले से ही चरम पर है। हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के रोहड़ू दौरे के दौरान सरकारी पोस्टरों से वीरभद्र सिंह की तस्वीर गायब होने और भाषणों में उनका जिक्र न होने पर भी प्रतिभा सिंह ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की थी।
प्रतिभा सिंह के कड़े रुख से प्रदेश की राजनीति में सुगबुगाहट तेज
नई पार्टी के गठन की सुगबुगाहट के बीच प्रतिभा सिंह के इस कड़े रुख ने सूबे की सियासत में हलचल तेज कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वीरभद्र सिंह के नाम और विरासत का प्रभाव हिमाचल के जनमानस पर आज भी गहरा है, यही वजह है कि परिवार अपनी इस राजनीतिक पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह मुस्तैद दिख रहा है।