174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मछार को मिले राष्ट्रीय सम्मान, बोले शांता कुमार

18 घंटे पहले
Shanta Kumar

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने इजराइल के एक विमान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट श्री स्मित मछार की अदम्य बहादुरी और सूझबूझ की पुरजोर सराहना की है। पालमपुर से जारी एक बयान में शांता कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि इस साहसी भारतीय पायलट को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाए तथा कम से कम एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाए।

उन्होंने कहा कि विश्व इतिहास में यह अपनी तरह का पहला और अनूठा मामला हो सकता है, जहां जानलेवा हमले के बावजूद एक पायलट ने असाधारण धैर्य दिखाते हुए विमान में सवार सैकड़ों मासूम लोगों की जान बचाई।

 

सह-पायलट के चाकू से हमले के बाद भी भारतीय पायलट ने नहीं खोया आपा

घटना की जानकारी देते हुए शांता कुमार ने बताया कि दुबई से तेल अवीव जा रहे इजराइली विमान की कमान भारतीय पायलट स्मित मछार के हाथों में थी। उड़ान के दौरान सह-पायलट, जिसका संबंध कथित तौर पर जिहादी विचारधारा से बताया गया है, ने मुख्य पायलट स्मित मछार पर चाकू से अप्रत्याशित हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से एक पल के लिए विमान थोड़ा अनियंत्रित होकर नीचे आ गया, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने और जीवन संकट में होने के बावजूद भारतीय पायलट ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए स्वयं को संभाला और कॉकपिट में विमान का नियंत्रण वापस हासिल किया। इस दौरान विमान में मौजूद अन्य क्रू मेंबर्स और यात्रियों की मदद से हमलावर सह-पायलट को काबू में कर लिया गया।

 

इजरायली पीएम नेतन्याहू ने भी की प्रशंसा

शांता कुमार ने कहा कि 174 यात्रियों से भरे इस विमान को सुरक्षित बचाना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी भारतीय पायलट स्मित मछार के इस अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। विदेश में एक भारतीय द्वारा दिखाया गया यह साहस पूरे देश के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी विषम परिस्थिति में डर पर विजय पाकर विमान को सुरक्षित लैंड कराना अद्वितीय वीरता का परिचायक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विशेष आग्रह किया है कि केंद्र सरकार भारतीय पायलट को सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय सम्मान देकर देश की ओर से आभार व्यक्त करे, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी कर्तव्य और मानवता की प्रेरणा मिल सके।

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