कुल्लू में पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल: शील्ड ट्रस्ट और कुल्लू साइंस स्कूल ने चलाया पौधरोपण अभियान, बाशिंग में रोपे देवदार के पौधे

10 घंटे पहले
Shield Trust Kullu Science School Plantation Drive

रमेश कंवर: कुल्लू

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश देने के लिए एक सराहनीय पहल सामने आई है। शील्ड ट्रस्ट ने “ग्रीन टुडे | ग्रीनर टुमॉरो” थीम के तहत कुल्लू साइंस स्कूल, बाशिंग के सहयोग से एक विशेष पौधरोपण अभियान का सफल आयोजन किया।

इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना तथा क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों ने पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया।

बाशिंग स्कूल परिसर में रोपे गए देवदार के पौधे

अभियान के दौरान कुल्लू साइंस स्कूल बाशिंग के परिसर में देवदार प्रजाति के 10 पौधे रोपे गए। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण के इस संदेश को समाज तक पहुंचाने के लिए विद्यार्थियों और शिक्षकों को घरों के आसपास लगाने हेतु पौधे वितरित किए गए।

 

कुल्लू वन विभाग का मिला विशेष सहयोग और मार्गदर्शन

इस हरित पहल को कुल्लू वन विभाग का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। वन विभाग की ओर से पौधे उपलब्ध करवाने के साथ-साथ पौधरोपण की सही तकनीक पर मार्गदर्शन भी दिया गया, जिसके लिए शील्ड ट्रस्ट ने डीएफओ और रेंज ऑफिसर का विशेष आभार जताया।

प्रधानाचार्य इंदु भारद्वाज ने पौधों की देखभाल पर दिया जोर

कुल्लू साइंस स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती इंदु भारद्वाज ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि केवल पौधरोपण करना ही काफी नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे रोपे गए सभी पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएं।

पर्यावरण संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी: रितांजलि हस्तीर

शील्ड ट्रस्ट की अध्यक्ष रितांजलि हस्तीर ने अपने संबोधन में कहा कि हिमाचल की प्राकृतिक धरोहर को बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभियान युवाओं को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।

पौधरोपण अभियान की सफलता देखभाल और संरक्षण पर निर्भर

कार्यक्रम के अंत में शील्ड ट्रस्ट के सचिव डॉ. योगेश भारद्वाज ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान की वास्तविक सफलता लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने और निरंतर बढ़ने से तय होगी।

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