रमेश कंवर: कुल्लू
Kullu News: भाषा एवं संस्कृति विभाग कुल्लू द्वारा राजभाषा हिंदी पखवाड़े के उपलक्ष्य में देव सदन सभागार में जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले की विभिन्न सरकारी व गैर-सरकारी 15 पाठशालाओं की नवीं से बारहवीं कक्षा के लगभग 50 मेधावी विद्यार्थियों ने निबंध, भाषण और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत के साथ हुआ, जिसके बाद प्रतिभागियों के बीच ज्ञान और अभिव्यक्ति की शानदार प्रतियोगिता देखने को मिली।
कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक (SP) कुल्लू अभिषेक सेकर ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए एसपी अभिषेक सेकर ने हिंदी भाषा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, व्यावहारिक प्रयोग और महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने युवाओं को हिंदी के साथ-साथ अपनी स्थानीय मातृभाषा का अधिकाधिक प्रयोग करने और उसे भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित करने के लिए प्रेरित किया। तत्पश्चात मुख्यातिथि ने प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को स्मृति चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
निबंध, भाषण और प्रश्नोत्तरी के विजेताओं की सूची
निबंध प्रतियोगिता में “वैश्विक भाषा के रूप में हिंदी” और “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में हिंदी” विषय पर जीबीएचएसएस भुंतर की सौम्या शर्मा ने प्रथम, जीबीएचएसएस बजौरा की दामिनी ठाकुर ने द्वितीय तथा भारत भारती कुल्लू की अनोखी ने तृतीय स्थान हासिल किया। वहीं भाषण प्रतियोगिता में शहीद बालकृष्ण जीबीएचएसएस कुल्लू के मोहित ठाकुर प्रथम, पीएम श्री स्कूल भुंतर की हिमानी पंत द्वितीय और जीबीएचएसएस मौहल की हर्षिता ठाकुर तृतीय रहीं। हिंदी व्याकरण व साहित्य आधारित प्रश्नोत्तरी में जीबीएचएसएस पीज की उशमिता ठाकुर प्रथम, पीएम श्री स्कूल कुल्लू की वर्षा ठाकुर द्वितीय तथा ब्रह्मर्षि शिक्षा निकेतन कुल्लू की योगिता ठाकुर तृतीय स्थान पर रहीं।
वरिष्ठ साहित्यकारों ने निभाई निर्णायक की भूमिका
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दयानंद गौतम, रंगमंच कलाकार मीनाक्षी ठाकुर तथा हिंदी प्रवक्ता दोतराम पहाड़िया ने निर्णायक मंडल की भूमिका का निर्वहन किया, जबकि मंच का सफल संचालन युवा कवयित्री वैशाली बिष्ट ने किया। इससे पूर्व जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया ने मुख्यातिथि, निर्णायकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और इसके उज्ज्वल भविष्य पर अपने विचार व्यक्त किए।