Sapiti Valley: 160 साल पहले 40 कुलियों संग स्पीति पहुंचे ब्रिटिश फोटोग्राफर सैमुअल बॉर्न ने कैमरे में कैद की थी ‘की मोनेस्ट्री’

Sapiti Valley, Kee Monastery

रमेश कंवर

हिमाचल प्रदेश की मनमोहक और दुर्गम स्पीति घाटी (Sapiti Valley) अपने सदियों पुराने मठों, अनूठी संस्कृति और अलौकिक दृश्यों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। आज से करीब 160 साल पहले, जब इस घाटी की ऊंची-नीची पहाड़ियों तक पहुंचना बेहद जोखिम भरा और दुर्गम था, तब एक ब्रिटिश फोटोग्राफर अपने भारी-भरकम कैमरों और करीब 40 कुलियों के काफिले के साथ यहां पहुंचा था। उस फोटोग्राफर ने स्पीति की विश्व प्रसिद्ध ‘की मोनेस्ट्री’ (Kee Monastery) की एक ऐसी ऐतिहासिक तस्वीर उतारी, जो आज भारतीय इतिहास का दुर्लभ दस्तावेज बन चुकी है।

यह ऐतिहासिक और दुर्लभ तस्वीर प्रसिद्ध ब्रिटिश फोटोग्राफर सैमुअल बॉर्न (Samuel Bourne) ने अपने वर्ष 1866 के साहसिक हिमालयी अभियान के दौरान खींची थी। इस तस्वीर को स्पीति घाटी स्थित की मोनेस्ट्री की सबसे पुरानी और प्रामाणिक तस्वीरों में से एक माना जाता है, जो आज ‘नेशनल गैलरीज ऑफ स्कॉटलैंड’ (National Galleries of Scotland) के संग्रह में “Ki Monastery, Spiti, India” नाम से सुरक्षित है।

 

7 साल भारत में रहे सैमुअल बॉर्न, शिमला में की थी ऐतिहासिक स्टूडियो की शुरुआत

विश्व फोटोग्राफी के शुरुआती दौर के प्रमुख अग्रदूतों में शामिल सैमुअल बॉर्न ने वर्ष 1862 से 1869 के बीच करीब सात साल भारत में बिताए। इस दौरान उन्होंने देश के विभिन्न भौगोलिक हिस्सों की व्यापक यात्राएं कीं और ऐसी तस्वीरें खींचीं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फोटोग्राफी को एक नया आयाम दिया। भारत की इन दुर्लभ तस्वीरों को बॉर्न ने ब्रिटेन के लोगों और संग्रहालयों को बेचा, जिससे दुनिया भर के यात्रियों में भारत को देखने की लालसा बढ़ी। बाद में उन्होंने शिमला और कोलकाता में प्रसिद्ध ‘Bourne & Shepherd’ स्टूडियो की स्थापना की, जो लंबे समय तक एशिया का सबसे प्रतिष्ठित फोटोग्राफी स्टूडियो रहा।

वर्ष 1866 में ब्रिटिश फोटोग्राफर सैमुअल बॉर्न द्वारा कैमरे में कैद की गई स्पीति घाटी की फोटो

40 कुलियों के साथ 6 महीने का हिमालयी अभियान, गौमुख तक तय किया सफर

सैमुअल बॉर्न की सबसे ऐतिहासिक और कठिन यात्राओं में से एक उनका 1866 का हिमालयन एक्सपेडिशन (अभियान) था। कांच की भारी प्लेटों, रसायनों और भारी-भरकम कैमरों को उठाने के लिए करीब 40 कुलियों के साथ बॉर्न लगभग छह महीने तक हिमालय की कठिन पहाड़ियों में घूमते रहे। उनका मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के वास्तविक उद्गम स्थल की तस्वीर लेना था। इस अभियान में वे कुल्लू, लाहौल और स्पीति से होते हुए सतलुज और बस्पा घाटियों तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने नीला दर्रा पार कर गढ़वाल की ओर रुख किया और गंगोत्री ग्लेशियर स्थित गौमुख की ऐतिहासिक तस्वीर खींची।

वर्ष 1866 में ब्रिटिश फोटोग्राफर सैमुअल बॉर्न द्वारा कैमरे में कैद की गई स्पीति घाटी की फोटो

मणिरंग दर्रे से 18,600 फीट की ऊंचाई पर बनाया था फोटोग्राफी का विश्व रिकॉर्ड

इसी स्पीति अभियान के दौरान बॉर्न ने मणिरंग दर्रे (Manirang Pass) की लगभग 18,600 फीट की अत्यधिक ऊंचाई से एक दृश्य कैमरे में कैद किया था। उस दौर में इतनी विषम परिस्थितियों और अत्यधिक ऊंचाई पर जाकर फोटोग्राफी करना अपने आप में एक बड़ा विश्व रिकॉर्ड था, जो कई दशकों तक कायम रहा।

वर्ष 1866 में ब्रिटिश फोटोग्राफर सैमुअल बॉर्न द्वारा कैमरे में कैद की गई स्पीति घाटी की फोटो

सोचिए, आज से 160 साल पहले जब स्पीति घाटी (Sapiti Valley) में आधुनिक सुविधाएं और सड़कें नाममात्र भी नहीं थीं, तब काँच की प्लेटों पर फोटोग्राफी का यह अद्भुत कारनामा रचा गया। ‘की मोनेस्ट्री’ की यह 1866 की तस्वीर केवल एक फोटो नहीं, बल्कि स्पीति घाटी के समृद्ध बौद्ध इतिहास और शुरुआती साहसिक फोटोग्राफी का अमर साक्ष्य है।

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