Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में भुंतर एयरपोर्ट के समीप मंगलवार शाम करीब सात बजे ट्रैफिक पुलिस के नाके पर एक कार चालक का हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। पुलिस द्वारा HP-66A-8666 नंबर की रेनॉल्ट कार को जांच के लिए रोके जाने पर शराब के नशे में धुत चालक पुलिस कर्मियों और मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों से उलझ पड़ा। चालक ने न केवल पुलिस और पत्रकारों से बहसबाजी की, बल्कि कवरेज कर रहे एक मीडियाकर्मी का कैमरा तोड़ने की भी कोशिश की।
पुलिस द्वारा एल्कोहल डिटेक्टर से जांच करने पर डिवाइस में रीडिंग करीब 86 आई, जिससे उसके शराब के नशे में वाहन चलाने की पुष्टि हुई। इसके बाद जब पुलिस ने वाहन को साइड में लगाने का निर्देश दिया, तो चालक आपा खो बैठा। उसने मौके पर तैनात एक महिला पुलिस कर्मी के समक्ष अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया और कथित तौर पर अपने पिता के बीएसएनएल में बड़े पद पर होने की धौंस दिखाते हुए देख लेने की धमकियां दीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नशे में धुत्त चालक ने करीब आधे घंटे तक सड़क पर जमकर हंगामा काटा। पुलिस अधिकारियों और मीडियाकर्मियों ने काफी देर तक संयम बरतते हुए उसे समझाने का प्रयास किया कि शराब पीकर गाड़ी चलाना कानूनन अपराध है और इससे दूसरों की जान को भी खतरा हो सकता है।
बावजूद इसके, आरोपी लगातार गाली-गलौज करता रहा। मीडियाकर्मी जब पेशेवर दायित्व निभाते हुए घटना की रिकॉर्डिंग कर रहे थे, तो आरोपी ने उनका कैमरा छीनने व तोड़ने का प्रयास किया और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दीं।
मामला केवल शराब पीकर वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ऑन-ड्यूटी पुलिस कर्मियों से अभद्रता, महिला पुलिस कर्मी के सामने अश्लील टिप्पणी और मीडिया कर्मी पर हमले के प्रयास जैसे गंभीर मोड़ ले चुका था। इसके बावजूद मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों द्वारा संयम दिखाते हुए चालक को वहां से जाने देने की बात सामने आ रही है, जिससे स्थानीय जनता और बुद्धिजीवी वर्ग में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसी घटना पड़ोसी राज्यों में हुई होती, तो आरोपी चालक तुरंत सलाखों के पीछे होता। ऐसे में कुल्लू पुलिस की ढिलाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या प्रशासनिक दबाव के कारण कार्रवाई में नरमी बरती गई।
घटना के बाद मीडिया जगत और स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है। पत्रकारों का मानना है कि कवरेज कर रहे मीडियाकर्मी के साथ बदसलूकी और कैमरा तोड़ने का प्रयास व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है।
अब देखना यह होगा कि भुंतर ट्रैफिक पुलिस और कुल्लू पुलिस प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम, चालक के खिलाफ दर्ज कानूनी धाराओं और मीडियाकर्मी के साथ हुए दुर्व्यवहार पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करता है तथा आरोपी के खिलाफ क्या सख्त कानूनी कदम उठाए जाते हैं।