रमेश कंवर: शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों लाहुल-स्पीति की युवा विधायक अनुराधा राणा (Anuradha Rana) का नाम प्रमुखता से उभरा है। प्रदेश के आदिवासी नेतृत्व में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए कांग्रेस आलाकमान ने उन पर बड़ा भरोसा जताया है। पार्टी संगठन ने उन्हें एक साथ दो महत्वपूर्ण और बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
शिमला के राजीव भवन में आयोजित पदभार ग्रहण समारोह में विधायक अनुराधा राणा ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के आदिवासी विभाग के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल लिया। इस अवसर पर आदिवासी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया और प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके साथ ही पार्टी के मीडिया सेल के पुनर्गठन के तहत उन्हें प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पद की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हिमाचल विधानसभा की सबसे युवा और एकमात्र महिला कांग्रेस विधायक
अनुराधा राणा की यह नियुक्ति कई मायनों में ऐतिहासिक है। वे हिमाचल प्रदेश की 14वीं विधानसभा की सबसे युवा विधायक होने के साथ-साथ वर्तमान में कांग्रेस विधायक दल की एकमात्र महिला विधायक हैं। वर्ष 2024 के उपचुनाव में लाहुल-स्पीति सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज कर उन्होंने 52 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद घाटी को महिला प्रतिनिधित्व दिलाया था। जिला परिषद अध्यक्ष के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाली अनुराधा राणा का यह राजनीतिक सफर उनके जमीनी संघर्ष और ईमानदारी का प्रतीक माना जाता है।
आलाकमान का बड़ा दांव, मीडिया में बनेंगी कांग्रेस की मुख्य आवाज
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह दोहरी नियुक्ति सिर्फ एक पदोन्नति नहीं, बल्कि पार्टी आलाकमान का उन पर अटूट विश्वास है। एक ओर पूरे प्रदेश के आदिवासी समाज की अध्यक्षता और दूसरी ओर मीडिया के मंच पर पूरी प्रदेश कांग्रेस का पक्ष रखना, यह दोहरी राजनीतिक जिम्मेदारी आज तक हिमाचल के किसी भी आदिवासी नेता को एक साथ नहीं मिली थी। वरिष्ठ प्रवक्ता के रूप में वे अब प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों, सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों और पार्टी की नीतियों को मजबूती से जनता के बीच रखेंगी।
लाहुल-स्पीति घाटी में जश्न का माहौल, समर्थकों में भारी उत्साह
पार्टी नेतृत्व के इस फैसले के बाद लाहुल-स्पीति घाटी सहित पूरे प्रदेश में कार्यकर्ताओं द्वारा खुशी जताई जा रही है। स्थानीय युवाओं और समर्थकों का मानना है कि इस निर्णय से जनजातीय क्षेत्र का मान बढ़ा है। अनुराधा राणा के समर्पण और जनसेवा के जज्बे को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में वे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्रभावी आदिवासी चेहरों में से एक के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएंगी।